Wednesday, September 11, 2019

राजस्थान की महिला महान हस्तीयाँ

इन महिलाओं ने उस जमाने में घर की चौखट से बाहर निकल अपने लिए मुकाम हासिल किया। जब यहां पुरुष समाज का बोलबाला था।
जहां वर्तमान में प्रदेश की महिलाएं अपनी योग्यता साबित कर पूरे प्रदेश का नाम रोशन कर रही हैं, तो वहीं यहां कुछ ऐसी महिलाओं ने जन्म लिया जो आज भले ही बीती बात हो चुकी हों, लेकिन इनके योगदान के लिए आज भी इन्हें जाना जाता हैं। इन महिलाओं ने उस जमाने में घर की चौखट से बाहर निकल अपने लिए मुकाम हासिल किया। जब यहां पुरुष समाज का बोलबाला था। इसके अलावा कुछ वीरांगनाओं ने तो अपने ऐताहिसक फैसले और वीरता से राजस्थानी माटी को एक नया पहचान दिलाया। ये महिलाएं कभी किसी पहचान की मोहताज नहीं रही। आइए जानते हैं इन महिला हस्तियों के बारे में...
 Women Personalities OF RAJASTHAN
महारानी गायत्री देवी-
अपने खास जीवन शैली और सुंदरता के लिए इनका नाम विश्व की सुंदर स्त्रियों में लिया जाता था। इनका जन्म 23 मई 1919 लंदन में हुआ। इनका नाम दुनिया की 10 सबसे सुदंर महिलाओं में लिया जाता था, जिसे वोग मैगजीन द्वारा चुना गया था। राजनीति में भी प्रवेश किया तथा जयपुर से भाजपा की सांसद चुनी गई। भारत में इमरजेंसी के दौरान इंदिरा गांधी के कोप के भाजन भी बनना पड़ा, और गिफ्तार कर जेल में डाल दिया गया था। इनकी सुंदरता के चर्चे दूर-दूर तक थे। तो वहीं इनकी सुंदरता के दिवानों में कई बड़े चेहरे भी शामिल थे। 29 जुलाई 2009 रानी गायत्री का जयपुर में निधन हो गया।
Gayatri Devi
हाड़ी रानी-
यहां के वीर पुत्रों के साथ इस माटी में जन्मी कुछ ऐसी भी वीरांगनाओं के बारे में जानने को मिलता है, जिनकी मिसाल आज भी राजस्थान के लोग बड़े शान और अदब से देते हैं। इन्हीं में से एक थी हाड़ा रानी। राजस्थान खासकर मेवाड़ के स्वर्णिम इतिहास में इनको विशेष स्थान प्राप्त है। बात 16वीं शताब्दी की है, इस नई-नवेली दुल्हन ने अपने वीर को जीत दिलाने के लिए अपना कटा शीश रणभूमि में भिजवा दिया था। तो वहीं हाड़ा रानी के नाम पर राजस्थान पुलिस की महिला बटालियन का नामकरण भी किया गया है। हाड़ी रानी जैसी वीरांगना इस वीर धरती के लिए बलिदान की एक अनूठी मिसाल हैं।
hadi rani


Rani Padmini
मीरा बाई-
मीरा बाई जन्म 1498 में राजस्थान के पाली स्थित कुड़की गांव में हुआ था। इनका नाम कृष्ण भक्ति शाखा की अहम कवयित्रियों में लिया जाता है। ये सोलहवीं शताब्दी की विश्व चर्चित हिन्दू कवयित्री थीं। तो वहीं इन्हें कृष्ण का परम भक्त के नाम से भी जाना जाता है। इनके द्वारा रचित पदों में कृष्ण की भक्ति झलकती थी। इतना ही कृष्ण को वो अपना स्वामी तक मानती थी, और इसके लिए उन्हें कई विरोधों का भी समाना करना पड़ा। उस काल में मीरा बाई रुढ़िवादी परंपराओं की अहम आलोचक के साथ मुखर विरोधी रही। इनकी मृत्यु 1557 में द्वारिका में भगवान कृष्ण की साधना करते हुई।
meera bai
पन्ना धाय-
मेवाड़ के शासक राणा सांगा के पुत्र उदयसिंह की धाय मां जिसे राजस्थान में पन्ना धाय के नाम से जाना जाता है। जानकारों के मुताबिक, इनका जन्म 8 मार्च 1490 को राजस्थान के पांडोली गांव में हुआ था। जबकि चित्तौड़ का शासक बनने की लालसा रखने वाला दासी पुत्र बनवीर से उदयसिंह को बचाने के लिए ये कुंभलगढ़ के जगंलों में काफी दिनों तक भटकती रही। इनके बलिदान की मिसाल पूरे प्रदेश में दी जाती है, कि कैसे बनवीर से उदयसिंह को बचाने के लिए पन्ना धाय ने उन्हें झूठी पत्तल में रख महल के बाहर भिजवा दिया और उनके स्थान पर अपने पुत्र को सुला दिया। जिसके बाद बनवीर की रक्तरंजित तलवार ने उनके बेटे चंदन की हत्या कर दी। बावजूद इसके पन्ना धाय अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटी। इनके नाम पर राज्य सरकार पन्नाधाय जीवन अमृत योजना भी चला रही है, जो कि महिलाओं के लिए विशेष रुप से लाई गई है।

panna dhai
यशोदा देवी-
देश की आजादी के बाद राजस्थान में पहली बार विधानसभा का चुनाव साल 1952 में हुआ, हालांकि इसमें राज्य की किसी महिला उम्मीदवार ने जीत नहीं दर्ज कर सकी थी। लेकिन उसके बाद 1953 में हुए उपचुनाव में बांसवाड़ा विधानसभा सीट से यशोदा देवी चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचने वाली राज्य की पहली महिला विधायक बनने का गौरव हासिल किया। 3 जनवरी 2004 में इनका निधन हो गया। इनका जन्म 1927 में हुआ था।
yashoda devi
सुमित्रा सिंह-
राजस्थान विधानसभा की पहली महिला अध्यक्षा सुमित्रा सिंह का जन्म 3 मई 1930 को हुआ था। साल 1957 में अखिल भारतीय कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत पहली बार विधायक बनी। इसके बाद साल 1962 से लगातार चार बार इन्होंने झुंझुनू से विधानसभा चुनाव जीता। साल 2003 में बीजेपी के टिकट पर झुंझुनू से विधायक बनकर अब तक नौ बार विधानसभा पहुंचने का गौरव हासिल कर चुकी हैं। साल 2004 में सुमित्रा सिंह को राजस्थान विधानसभा का 12वीं अध्यक्षा के तौर पर चुना जा चुका है।
sumitra singh

Tuesday, September 10, 2019

गैंगस्टर राजू ठेठ सीकर

राजस्थान गैंगस्टर राजू ठेठ के जीवन पर आधारित कुछ बाते

सीकर. राजस्थान का गैंगस्टर राजू ठेहट जितना खतरनाक है, उतना ही शातिर भी है। यह अपने दुश्मनों को मौत के घाट उतारने में कतई गुरेज नहीं करता। इसके एक इशारे पर गिरोह के सदस्य लूट, मारपीट, फायरिंग व हत्या तक की वारदातों को अंजाम दे डालते हैं।
Click by Video Raju Theth: https://youtu.be/C-1KDl3igK4
खुद राजू ठेहट के हाथ कइयों के खून से रंगे हुए हैं। 15 अक्टूबर 2018 को राजू ठेहट को सीकर जिले के बहुचर्चित विजयपाल हत्याकांड में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। विजयपाल हत्याकांड में सीकर कोर्ट द्वारा राजू ठेहट व उसके साथी मोहन मांडोता को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के साथ ही इस केस की रोचक कहानी भी एक बार फिर से लोगों की जुबां पर है।

Raju Theth Sikar की कहानी की शुरुआत होती है मई 2005 से। दरअसल राजू ठेहट गैंग की विजयपाल से दुश्मनी थी। नतीजतन राजू ठेहट व मोहन मांडोता आदि ने 22 मई 2005 को सीकर जिले के रानोली इलाके में विजयपाल व उसके साथी भंवरलाल से मारपीट, जिसमें विजयपाल की मौत हो गई। भंवरलाल गंभीर रूप से घायल हो गया था। आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर पुलिस ने इनकी तलाश शुरू कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद राजू ठेहट व मोहन मांडोता फरार हो गए।
दोनों ने आसाम, बंगाल, महाराष्ट व झारखण्ड में फरारी काटी और इसी दौरान भगवान शिव की भक्ति शुरू कर दी। इस बात का पता तब चला जब राजस्थान एटीएस को राजू ठेहट व मोहन मांडोता के झारखण्ड के देवधर में होने की भनक लगी।
एटीएस ने देवधर में दोनों के संभावित ठिकानों पर दबिश देनी शुरू की तो ये कावंड़ लाते मिले। राजस्थान एटीएस ने दोनों को देवधर से 16 अगस्त 2013 को कावंड़ लाते समय ही गिरफ्तार किया था।


भंवरलाल की गवाही ने दिलाई सजा

घटना जून 2005 की थी। आरोपित आठ साल बाद गिरफ्तार हुए। इस दौरान अनेक सबूत व साक्ष्य नष्ट हो गए। पूरे मामले में विजयपाल के साथी भंवरलाल की गवाही ही फैसले का मुख्य आधार बनी। वह कभी अपनी बात से नहीं मुकरा। हमले में खुद भंवरलाल भी घायल हो गया था।
वह गवाही नहीं दे सके, इसलिए उसे धमकाया गया था। हमले का प्रयास भी किया गया था, लेकिन चश्मदीद गवाह भंवरलाल अडिग रहा। प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल तेरह गवाहों के मौखिक बयान कराए गए। दस्तावेजी साक्ष्य के रूप में 34 दस्तावेजी साक्ष्य प्रदर्शित किए गए।

राजस्थान का साहित्य

राजस्थानी साहित्य राजस्थानी भाषा के साहित्य की संपूर्ण भारतीय साहित्य म अपनी एक अलग पहचान है। राजस्थानी का चीन साहित्य अपनी विषालता एवं ...